संगठन का परिचय

संगठन का परिचय

रोड़ एम्पलाइज एसोसिएशन इतिहास के आईने से - 29.05.1986 से 

इंसान आज कल इस कदर संवेदनहीन व मशीनी हो गया है कि उसे केवल और केवल अपनी चिंता रहती है। अन्य सामाजिक कार्यों से मानो उसका कोई सरोकार नहीं रहा है, मगर कुछ हस्तियाँ मानों दूसरों के लिए पैदा होती है, जो खुद को दूसरों के हितों के लिए तपस की भट्ठी में झोंक देती है। इसी सत्य को उजागर किया है कि रोड़ समाज के उन महामानवों ने, जिन्होंने दूसरों की भलाई के लिए 29.12.1985 को रोड़ धर्मशाला में एक बैठक बुलाई, जिसका उद्देश्य था -‘रोड़ समाज के हित में कोई अनूठा काम करना’। इसी सन्दर्भ में उन्होंने पुनः 23.03.1986 को बैठक करके सर्व-सम्मति से कमेटी का गठन किया। इस मुहिम के पुरोधा व संयोजक थे - डॉ रामस्वरूप चैहान, डॉ महेन्द्र कुमार चैधरी, डॉ बलबीर चैधरी, डॉ सत्यपाल, डॉ रत्न सिंह, चौ धर्मवीर सिंह हुड्डा, डॉ आर. एस. मैहला, डॉ अजमेर सिंह, डॉ सुरिन्द्र सिंह वर्मा, ओम प्रकाश, परमाल सिंह, डी.पी. गीड़, बाबू राम इत्यादि।

इन बुद्धिजीवियों ने चिन्तन किया कि क्यों न रोड़ समाज के कर्मचारियों को संगठित किया जाए तथा आम समाज की भलाई के लिए कोई कार्य किया जाए। इस मुहिम को अमलीजामा पहनाने के लिए चौ धर्मवीर सिंह हुड्डा जी को कर्मचारी संगठन का संविधान बनाने का कार्य सौंपा गया। उनकी बदौलत 29.05.1985 को ‘रोड़ एम्पलाइज एसोसिएशन’ का गठन हो गया। इसके बाद 03.08.1986 को संविधान के अनुरूप एसोसिएशन के सदस्यों का चुना गया। इसमें डॉ राम स्वरूप चैहान को प्रधान व डॉ महेन्द्र कुमार चैाधरी को महासचिव बनाया। 12 वर्ष तक डॉ राम स्वरूप चैहान इस पद पर रहे और 06.09.1998 से 20 जून 2010 तक डॉ एम. के. चैाधरी ने इस पद पर कार्य किया।

कर्मचारी संगठन को बनाने के बाद उन्होंने कर्मचारियों को सदस्य बनाना आरंभ किया जिसकी आजीवन सदस्यता 1100/- रूप्ये रखी गई। 1986 में ये राशि मामूली नहीं थी, लेकिन फिर भी संगठन के पदाधिकारियों ने बड़ी लग्न व परिश्रम से कर्मचारियों को इस संगठन का सदस्य बनाया था और इस राशि को बैंक में एफ.डी. के रूप में रखा। फिर कर्मचारी संगठन की कार्यकारिणी ने फैसला लिया कि इस राशि के ब्याज से प्रतिभावान गरीब छात्रों की पढ़ाई के लिए सहायता की जाए। इसी फैसले को अपनाते हुए यह संगठन प्रति वर्ष लगभग एक लाख रूप्ये छात्रवृत्ति के रूप में दे रहा है। उसने अभी तक सैंकड़ों छात्रों की आर्थिक सहायता दी है। इसके अतिरिक्त एक अच्छी लाइब्रेरी और इन्फरमेशन व गाइडेन्स सैन्टर की स्थापना की गई, जो कि रोड़ धर्मशाला, करनाल में चल रहा है।

इस एसोसिएशन का आरंभ से उद्देश्य रहा है - समाज का हित, समाज व कर्मचारियों को जोड़ना, इसी के मद्देनजर, इस संगठन ने हमेशा ही रोड़ बिरादरी के सहयोग से चलने वाली संस्थाएं जैसे - कन्या गुरूकुल व कॉलेज आदि में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया हे। बिरादरी की राजनीति के बारे में कभी कोई आलोचना नहीं की है।